शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

उलटबांसी

यहाँ से वहाँ तक

जामा मस्जिद के पास
एक से अधिक मीट की हैं दुकान
मुर्गे जैसे छोटे जीवों के शव-शरीर
टंगते — ललचाते मुल्लाजी।

भैंसों गायों बकरों का सर
सजने के लिए दुकानों पर
अल्लाह मियाँ ने खुद कुरआन में लिखवाया।

अब तो पण्डे भी देवी-देव
पर, पशु-पक्षी की बलि चढ़ा
प्रसाद रूप में बंटवाते / खाते
बतलाते — वेदों में है उल्लेखित यह।

'सिक्ख-पंथ' सरदारों का
प्रिय भोज — 'आमलेट' अंडे का
'गुरु-ग्रन्थ साहिब' में नानक ने
मेथड है दिया —
"मक्के दी रोटी सरसों दा साग साथ"।

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नयी दिल्ली, India
समस्त भारतीय कलाओं में रूचि रखता हूँ.