मंगलवार, 11 मई 2010

धनिया माँगते हैं

तीज त्योहारों पर ........................ जमादार.
शादी-ब्याह
और बच्चा होने पर ....................... हिंजड़े.
ज़रा-सा
कंस्ट्रक्शन शुरू करने पर ................. ठुल्ले.
.......................हक़, न्योत, चाय-पानी माँगते हैं.


पब्लिक स्कूल में
एडमिशन पर ............................. प्रिंसिपल.
परीक्षा से पहले
कमज़ोर बच्चों से ......................... ट्यूटर.
फेल को
पास में बदलने पर ...................... मास्टर.
...................... डोनेशन, फीस, बच्चों की मिठाई के लिए पैसा माँगते हैं.


तीर्थ स्थलों पर
शंख बजाकर .......................... मोटे साधू.
सरकारी दफ्तरों में
फाइलों के पास बैठे ......................... बाबू.
नौकरी के लिए
इंटरव्यू देने के बाद ................... निर्णायक.
....................... दान, पान-बीढ़ी, जेब गरम करने को लक्ष्मी माँगते हैं.


होटल में
खाना खिलाने के बाद ...................... बैरा.
प्लेट-फॉर्म पर
बोझा ढोने के बाद .......................... कुली.
सब्जीमंडी में
शाक खरीदने के बाद ................ ग्राहक.
........................ टिप, बक्शीश, धनिया माँगते हैं.

3 टिप्‍पणियां:

  1. मान गये, आपने तो इस कविता से सब को आईना दिखा दिया और इस विशाल आईने में तो सब एक जैसे दिख रहे है .... ... ... ... मान गये

    इस प्रस्तुति के लिए धन्यवाद .........

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  2. भाई, लिखा तो एकदम ठीक है... हम सभी को फ़्री का खानें की आदत हो गयी है....

    फ़्री की धनिया मिर्ची सब्ज़ी लेनें के बाद...
    वाह वाह

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नयी दिल्ली, India
समस्त भारतीय कलाओं में रूचि रखता हूँ.