गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

नया साल आया

  • विप्रा ने राजू से
    पूरे साल चाय का बड़ा कप भरवाया।
    नया साल आया।
  • नीरजा ने करन से
    कोसिमा के छत्ते पर फिर से हाथ लगवाया।
    नया साल आया।
  • कोटेश ने गीतिका से
    ऑफिस डेकोरम का राग गव्वाया।
    नया साल आया।
  • रियाज़ ने रिबिका से
    ज़ोर से बोलकर ईमेल के ज़रिये डेली स्टेटस मंगवाया।
    नया साल आया।
  • नीलम ने इन्दर से
    एक ही डाटा दो बार इंटर करवाया।
    नया साल आया।
  • गज़नफ़र ने मुझसे
    किया वादा कई रिमाइनडर पर भी नहीं निभाया।
    नया साल आया।
  • आई टी के चौहान ने कृष्णा और अरुण को
    गड़बड़ी होने पर प्यार से समझाया।
    नया साल आया।
  • विजयपाल और दीपा ने बिपुल को
    यू-टर्न का एक-एक फायदा गिनाया।
    नया साल आया।
  • डॉ रविन्द्र ने हँसकर
    हर क्वेरी / प्रोब्लम को लकड़ी बताया
    नया साल आया।
  • जीजू का एक्सेस कार्ड
    पिछले साल मोर्निंग में मोनिका ने छुआया
    नया साल आया।
  • अजोय ने कोटेश का
    रिसेशन के दिनों में फिर से वेतन बढ़ाया।
    नया साल आया।

(केवल काव्य रसिकों के निमित्त लिखी गयी )

बुधवार, 30 दिसंबर 2009

सालाना मुसाफिर

बारह महीने बाद फिर से
कान पर मफ़लर लपेटे
आ रहा जो कंपकंपाता
ईसवीं का साल नूतन ।

करो स्वागत - कर नमस्ते
पास में अपने बिठाकर
ओड़ने को दो रजाई
चाय कॉफ़ी पूछो भाई।

यूँ तो पीछे आ रहे हैं
और भी उसके मुसाफिर
करो उनका भी सु-आगत
उसी हर्षोल्लास से तुम।

इस मुसाफिर भीड़ में ही
विक्रमी संवत दिखेगा
ध्यान रखना - भाई मेरे,
पूर्वजों को भूल मत रे!

(प्रतिपल नवीन है मानो तो/ क्या नव वर्ष क्या गत वर्ष। कामना सदा रखो शुभ/ रहो उत्फुल्ल हुवे उत्कर्ष।)

मंगलवार, 22 दिसंबर 2009

पेड़ के हाथ-पाँव

कॉमनवेल्थ गेम को
बना नया खेल गाँव।
चौड़ी की जा रही हैं
आस-पास की सड़कें
बिन रुके गाड़ियां दौड़ने को
बनाए जा रहे हैं
मल्टी स्टोरी पुल।
इस होते विकास के तले
न जाने कितने ही सुन्दर-स्वस्थ पेड़ों को
जड़ समेत ख़त्म कर दिया गया।

ऐसे में एक दिन ...
लो-फ्लोर बस में बैठा
जब मैं निकल रहा था खेल गाँव से
अपने ऑफिस को सुबह-सुबह।
तब ही सोचा, प्रकृति निरीक्षण कर।

परमात्मा ने बनाया सभी जीवों को सम्पूर्ण
जिसको हाथ-पाँव देने थे।
उसे हाथ-पाँव दिए।
जिसे करना था खड़ा जड़वत
उसे कर दिया खड़ा वृक्ष रूप में।
जिसे देनी थी गति
उसे बना दिया घोड़ा।
जो गति पाकर भी
न हो पाया गतिवान (चालक)
बन गया समाज पर फोड़ा।

एक कल्पना कर सिहर जाता हूँ।
"अगर वृक्ष के होते हाथ-पाँव"
तो परमात्मा की व्यवस्था का क्या होता?
आज के मनुष्य को पास आता
देखकर
बिदक उठते पेड़
फडफडाती शाखाएं - आवाज करतीं -
"मेरी छाँव में आने से पहले
देना होगा - पहचान-पत्र,
करेक्टर सर्टिफिकेट
दिखाने होंगे - सभी कागज़ात
एक-एककर।
जब तक विश्वास न होगा -
प्रकृति प्रेमी होने का
न बैठ पाओगे - मेरी छाँव तले।"

जबरन कोई बैठ जाता
मूर्ख कालिदास की भांति
या, वृक्ष तले पड़े-पड़े
कुरेदता जड़ें - अस्थिर मति से।
पकड़-पकड़कर वृक्ष अपने हाथों से
स्वयं ही बचाव में अपने
उठ खड़े होते।
या, फिर थके राही को
सुनसान रेतीले प्रदेश में
जा-जा पास उसके छाया देते
फलदार फल देते
हलक सूखे हर संकोची राहगीर को।

परन्तु अच्छा ही हुआ
परमात्मा ने जिसे जो देना था
उसे वही दिया।
मनुष्य को 'हाथ-पाँव' - कर्म करने को
वृक्ष को 'शाखाएं' - छाया, फल देने को
पर्वत को 'उंचाई' - अहंकार की बाड़ से बचने को।
... जिसे जो-जो दिया
पूरा था
मगर असंतोषी लोभी मनुष्य
उसे मानता अधूरा है।

(नया खेल गाँव बनाने के लिए सेकड़ों वृक्ष काटे गए, उन कटे वृक्षों की स्मृति में)

सोमवार, 23 नवंबर 2009

माफ़ी

सर के दर्द से निज़ात पाने को
मैंने तमाम तरह की पैथियों का प्रयोग किया
लेकिन न हुआ तब भी सर का दरद कम।
मनोवैज्ञानिक से सलाह न ली
क्योंकि खर्च होती 'और रकम'
सो, स्वयं ही उसका निदान किया
सर का दरद कम करने को
दिमाग़ का विश्लेषण किया।

घर की छोटी-छोटी बातें -
जो मेरी परेशानी का सबब थी।
तालमेल न बैठ पाने से,
दूसरे की चुप्पी पर स्वयं चुप रह जाने से
परस्पर अहम् टकराने से
बढ़ रहीं थीं काफ़ी
उन सभी बातों पर
जब मैंने पूरी संवेदना से
मांगी 'माफ़ी'
मेरे सर का दर्द कम हो गया।

जान गया मैं - तनावों से, क्लेशों से
मुक्ति पाने का गोपनीय रहस्य
"माफ़ी" जो देती है घर को सुख-शान्ति
संबंधों को अनायास टूटन से बचाती है।
जो दूर कर देती है भ्रान्ति
कड़वाहट भरे दिलों को भी पास लाती है।
समझौता कराती है।
रिश्तों को दू..र तलक निभाती है।
- माफ़ी -
'साफी' की तरह
घुल जाती है पूरे शरीर में
द्वेष के दूषित रक्त को ख़तम
करती रहती है - निरंतर
माफ़ी, माफ़ी, माफ़ी॥

गुरुवार, 19 नवंबर 2009

मेंडक और सांप


मेंडक की शादी


सोमवार, 12 अक्तूबर 2009

काश ऐसा हो जाए


सोमवार, 5 अक्तूबर 2009

कविता तनाव समाप्त करती है।

काव्य के छः प्रयोजनों में एक प्रयोजन असाध्य बीमारियों से
छुटकारे का भी है।
"कविता तनाव समाप्त करती है।"

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Kavya Therapy

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नयी दिल्ली, India
समस्त भारतीय कलाओं में रूचि रखता हूँ.