शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

स्वीकार नहीं

"कुछ बन जाऊँ,
औरों से कुछ मैं अलग दिखूँ"
— स्वीकार नहीं.

"कवि हो जाऊँ,
सृष्टा से थोड़ा अलग दिखूँ"
— स्वीकार नहीं.

1 टिप्पणी:

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नयी दिल्ली, India
समस्त भारतीय कलाओं में रूचि रखता हूँ.