गुरुवार, 7 जनवरी 2010

मोडर्न आर्ट

जब तक
चबाता हूँ उसे -- पान है।
थूक दूँ तो -- पीक है।

कलाप्रेमी हूँ
तरीके से सदा थूकूँ।

कोर्ट की दीवार
कोने की
किवा
लम्बी लगी क्यू
बिल जमा करने की -- अंतिम डेट को।

मैं बिन कलर बिन ब्रश
बनाता हूँ -- मोडर्न आर्ट।
हर उस जगह
जिस पर निगाहें
देर से पड़तीं।
जब बोर होता
कोई, चिंताग्रस्त होता
खोई, द्रष्टि देखने लगती।
स्वतः ही आर्ट मोडर्न --- पीक की।

(सभी पान प्रेमियों को समर्पित )

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नयी दिल्ली, India
समस्त भारतीय कलाओं में रूचि रखता हूँ.